Surajkund: इतिहास, सूरजकुंड मेला और घूमने की पूरी जानकारी

Surajkund (सूरजकुंड) हरियाणा के फरीदाबाद में अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित 10वीं सदी का एक प्राचीन जलाशय है। फरीदाबाद ज़िला प्रशासन के अनुसार इसे तोमर वंश के राजा सूरजपाल ने बनवाया माना जाता है। अर्धगोलाकार, सीढ़ीदार तटबंध वाला यह कुंड रोमन एम्फीथिएटर जैसा दिखता है। आज सूरजकुंड अपने इतिहास के साथ-साथ हर साल फरवरी में लगने वाले सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है।
- Surajkund फरीदाबाद ज़िले में, अरावली की दक्षिणी दिल्ली रिज पर स्थित है।
- इसे 10वीं सदी में तोमर राजा सूरजपाल से जोड़ा जाता है।
- कुंड का तटबंध अर्धगोलाकार और सीढ़ीदार है – प्राचीन जल-प्रबंधन का उदाहरण।
- सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला आमतौर पर हर साल फरवरी के पहले पखवाड़े में लगता है।
- पास में अनंगपुर बांध, बड़खल झील और दमदमा जैसे स्थल भी हैं।
इस लेख में
- Surajkund का इतिहास
- Surajkund और तोमर वंश
- Surajkund की बनावट: प्राचीन जल प्रबंधन
- सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला
- मेले में खरीदारी के आसान टिप्स
- Surajkund कैसे पहुंचें
- Surajkund के आसपास घूमने की जगहें
- एक दिन का आसान प्लान
- Surajkund घूमने का सबसे अच्छा समय
- Surajkund में फोटोग्राफी
- यात्रा के लिए ज़रूरी सुझाव
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- आखिर में काम की बात
Surajkund का इतिहास
परंपरा के अनुसार सूरजकुंड को तोमर वंश के राजा सूरजपाल ने 10वीं सदी में बनवाया था। माना जाता है कि वे सूर्य के उपासक थे और उन्होंने कुंड के पश्चिमी किनारे पर एक सूर्य मंदिर भी बनवाया था। फरीदाबाद ज़िला प्रशासन की वेबसाइट बताती है कि यहां मिले अवशेषों के आधार पर माना जाता है कि यहां कभी सूर्य मंदिर था।
कुछ इतिहासकार सूरजपाल को मुख्य रूप से चारण (भाट) परंपरा से ज्ञात राजा मानते हैं। फिर भी सूरजकुंड का ढांचा इस्लाम-पूर्व काल की हिंदू स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | सूरजकुंड, फरीदाबाद, हरियाणा |
| भौगोलिक स्थिति | अरावली की दक्षिणी दिल्ली रिज |
| दिल्ली से दूरी | दक्षिण दिल्ली से लगभग 8 किमी |
| निर्माण काल | 10वीं सदी (परंपरा के अनुसार) |
| निर्माता | तोमर राजा सूरजपाल |
| विशेषता | अर्धगोलाकार सीढ़ीदार तटबंध, वर्षा जल संचयन |
| प्रसिद्ध आयोजन | सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला (फरवरी) |
Surajkund और तोमर वंश
तोमर वंश ने कभी दिल्ली और आसपास के क्षेत्र पर शासन किया था। परंपरा के अनुसार तोमर शासक अनंगपाल ने फरीदाबाद के अनंगपुर गांव के पास अपनी राजधानी बसाई थी और वहीं अनंगपुर बांध बनवाया। सूरजपाल को अनंगपाल तोमर का छोटा पुत्र बताया जाता है। यानी सूरजकुंड, अनंगपुर बांध और आसपास के अवशेष मिलकर तोमर काल की एक पूरी ऐतिहासिक तस्वीर बनाते हैं।
सूरजकुंड का जलाशय अर्धगोलाकार है और इसके चारों ओर पत्थर की चौड़ी सीढ़ियां बनी हैं। पहाड़ियों से बहकर आने वाला बारिश का पानी इसमें इकट्ठा होता था। यह दिखाता है कि उस समय के लोग अरावली जैसे सूखे इलाके में पानी बचाने का महत्व समझते थे।
पास ही सिद्ध कुंड नाम का एक और कुंड है, और लगभग 2 किमी दूर अनंगपुर बांध है, जिसे तोमर शासक अनंगपाल से जोड़ा जाता है।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला
सूरजकुंड मेला देश के सबसे बड़े शिल्प मेलों में गिना जाता है। यह मेला 1987 से लगातार आयोजित हो रहा है और आमतौर पर हर साल फरवरी के पहले पखवाड़े में लगता है। इसमें भारत के अलग-अलग राज्यों के कारीगर अपने हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद लेकर आते हैं, और कई दूसरे देश भी भाग लेते हैं।
- हस्तशिल्प और हथकरघा: कपड़े, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी और धातु का काम।
- लोक संस्कृति: अलग-अलग राज्यों के लोक नृत्य और संगीत।
- खानपान: देश के कई हिस्सों के पारंपरिक व्यंजन।
- थीम राज्य: हर साल किसी एक राज्य को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाता है।
मेले की सटीक तारीखें, टिकट और थीम हर साल हरियाणा पर्यटन विभाग घोषित करता है, इसलिए योजना बनाने से पहले आधिकारिक घोषणा ज़रूर देखें।
मेले में खरीदारी के आसान टिप्स
- पहले पूरे मेले का एक चक्कर लगाएं, फिर खरीदारी करें।
- हस्तशिल्प सीधे कारीगर से खरीदें – इससे उन्हें सही दाम मिलता है।
- नकद के साथ डिजिटल भुगतान का विकल्प भी रखें।
- भारी सामान के लिए बड़ा थैला साथ ले जाएं।
Surajkund कैसे पहुंचें
| माध्यम | जानकारी |
|---|---|
| सड़क | दक्षिण दिल्ली और फरीदाबाद से सीधा सड़क संपर्क |
| मेट्रो | दिल्ली मेट्रो से नज़दीकी स्टेशन तक जाकर आगे टैक्सी/ऑटो |
| हवाई अड्डा | इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नई दिल्ली |
Surajkund के आसपास घूमने की जगहें
- बड़खल झील: 1947 में बनी झील, जिसके पुनर्जीवन का काम चल रहा है।
- अनंगपुर बांध: तोमर काल से जुड़ा प्राचीन बांध।
- दमदमा झील (गुरुग्राम): अरावली की एक और झील।
- दिल्ली के ऐतिहासिक स्थल: तुगलकाबाद किला जैसी जगहें भी पास हैं।
एक दिन का आसान प्लान
- सुबह सूरजकुंड पहुंचकर कुंड और सीढ़ियां देखें।
- पास के सिद्ध कुंड और अनंगपुर बांध तक जाएं।
- दोपहर का भोजन फरीदाबाद या आसपास करें।
- शाम को लौटते समय बड़खल क्षेत्र या दिल्ली के किसी ऐतिहासिक स्थल को जोड़ें।
मेले के दिनों में पूरा दिन सिर्फ मेले के लिए रखें, क्योंकि वहां देखने और खरीदने को बहुत कुछ होता है।
Surajkund घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का मौसम सबसे अच्छा रहता है। अगर आप मेला देखना चाहते हैं तो फरवरी की योजना बनाएं। गर्मियों में दिन का तापमान ज़्यादा रहता है, इसलिए सुबह या शाम का समय चुनें। मानसून के बाद कुंड में पानी दिखने की संभावना अधिक रहती है।
Surajkund में फोटोग्राफी
सीढ़ीदार अर्धगोलाकार तटबंध और पीछे अरावली की पहाड़ियां फोटोग्राफी के लिए सुंदर फ्रेम बनाती हैं। सुबह और शाम की नरम रोशनी में तस्वीरें सबसे अच्छी आती हैं। ड्रोन या पेशेवर शूट की योजना हो तो पहले स्थानीय प्रशासन से अनुमति के नियम जांच लें।
यात्रा के लिए ज़रूरी सुझाव
- मेले के दिनों में भीड़ बहुत होती है – सुबह जल्दी पहुंचें।
- पानी की बोतल और आरामदायक जूते साथ रखें।
- प्राचीन संरचना पर न चढ़ें और न ही कुछ लिखें।
- कचरा तय जगह पर ही डालें।
हरियाणा की दूसरी प्रमुख जगहों के लिए हरियाणा पर्यटन गाइड और पहाड़ों के लिए मोरनी हिल्स देखें। हरियाणा के इतिहास पर पानीपत के युद्ध और हरियाणा दिवस वाले लेख पढ़ें। और जगहों के लिए घूमने की जगहें श्रेणी और Newspoke होमपेज पर जाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Surajkund कहां स्थित है?
सूरजकुंड हरियाणा के फरीदाबाद में, अरावली पहाड़ियों में दक्षिण दिल्ली से लगभग 8 किमी दूर है।
परंपरा के अनुसार इसे 10वीं सदी में तोमर वंश के राजा सूरजपाल ने बनवाया था।
Surajkund का अर्थ क्या है?
“सूरजकुंड” का अर्थ है “सूर्य का कुंड”। राजा सूरजपाल को सूर्य उपासक माना जाता है।
Surajkund मेला कब लगता है?
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला आमतौर पर हर साल फरवरी के पहले पखवाड़े में लगता है; सटीक तारीखें हर साल घोषित होती हैं।
Surajkund मेला कब से लग रहा है?
सूरजकुंड मेला 1987 से आयोजित हो रहा है।
Surajkund घूमने का सबसे अच्छा समय क्या है?
अक्टूबर से मार्च; मेला देखने के लिए फरवरी।
क्या Surajkund में हमेशा पानी रहता है?
नहीं, कुंड में पानी मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर करता है, इसलिए मानसून के बाद पानी दिखने की संभावना ज़्यादा रहती है।
Surajkund के पास और क्या देखें?
बड़खल झील, अनंगपुर बांध, दमदमा झील और दिल्ली का तुगलकाबाद किला।
आखिर में काम की बात
Surajkund इतिहास, स्थापत्य और संस्कृति – तीनों का अनुभव एक साथ देता है। सामान्य दिनों में यह शांत ऐतिहासिक स्थल है, जबकि फरवरी में मेला इसे रंगों से भर देता है। दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं तो एक दिन निकालकर सूरजकुंड, अनंगपुर बांध और बड़खल को साथ घूमने की योजना बनाएं।

